बंगाल में काफी अलग होगी सियासी तस्वीर बीजेपी ने दोहराया लोकसभा जैसा प्रदर्शन...

by-shivani bisht 

तेज निगाहें :-पश्चिम बंगाल के चुनावों पर पूरे देश की नजर है. अगले साल के इस सबसे अहम चुनाव में तृणमूल का जादू चलेगा या बीजेपी ममता बनर्जी के किले में सेंध लगाएगी. इस सवाल का जवाब सब जानना चाहते हैं. इसके लिए हाल के बंगाल चुनावों के वोटिंग पैटर्न पर निगाह डालना काफी जरूरी हो जाता है नए साल के जश्न के साथ ही देश तैयार हो रहा है

 साल 2021 के सबसे बड़े सियासी दंगल के लिए. बिहार की रोचक चुनावी जंग के बाद लोगों को अब पूर्वी भारत के मजबूत किले पश्चिम बंगाल में भी रोचक मुकाबले की उम्मीद है. एक तरफ जहां ममता बनर्जी केंद्र की एनडीए सरकार के खिलाफ मजबूती से मोर्चेबंदी में जुटी हैं तो वहीं बीजेपी ममता के किले में एक-एक कर सेंध लगाकर अपनी सेना मजबूत कर रही है. चुनावों की आहट के साथ ही टीएमसी के कई नेता ममता का साथ छोड़कर बीजेपी के खेमे में आ गए हैं जिससे बड़े सियासी उठापटक की अटकलें भी लगनी शुरू हो गई हैं.

कभी लेफ्ट और कांग्रेस का गढ़ रहा बंगाल पिछले एक दशक से ममता बनर्जी का अभेद्य सियासी किला बना हुआ है लेकिन पिछले 2 साल में बीजेपी ने ममता के इस मजबूत किले में जबरदस्त सेंधमारी की है. पहले पंचायत चुनावों में 500 से अधिक सीटें जीतकर, फिर पिछले लोकसभा चुनाव में 18 सीटों की जीत और अब मजबूत संगठन के जरिए विधानसभा चुनाव के लिए दमदार अभियान बीजेपी को लेकर उम्मीदों को मजबूत करता दिख रहा है.

बंगाल में बीजेपी को लेकर सियासी अटकलें यूं ही नहीं मजबूत हुई हैं. पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव के नतीजों को अगर विधानसभा सीटवार देखा जाए तो बड़े बदलावों के संकेत मिलते हैं. इस चुनाव में बीजेपी ने लेफ्ट और कांग्रेस को पीछे छोड़कर राज्य के सियासी परिदृश्य में खुद को फ्रंट सीट पर काबिज कर लिया. बंगाल का ये वोटिंग पैटर्न राज्य के बदलते सियासी सीन के बारे में काफी कुछ कहता है. वैसे तो लोकसभा और विधानसभा के चुनावों में मुद्दे और सियासी सीन अलग होते हैं लेकिन राज्य के सबसे लेटेस्ट चुनाव का वोटिंग पैटर्न अहमियत तो रखता ही है.









कैसे रहे थे लोकसभा चुनाव के बंगाल में नतीजे?

2019 के लोकसभा चुनाव में राज्य की 42 सीटों में से बीजेपी ने 18 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया. बीजेपी को पिछले चुनावों की तुलना में सीधे 16 सीटों का फायदा हुआ, जबकि ममता बनर्जी की टीएमसी 34 से घटकर 22 सीटों पर आ गई. कांग्रेस को सिर्फ दो सीटें मिलीं और लेफ्ट फ्रंट का तो खाता भी नहीं खुला. बीजेपी को 40.64% फीसदी वोट मिले जबकि टीएमसी को सिर्फ 3 फीसदी ज्यादा. बीजेपी का वोट शेयर 22 फीसदी बढ़ गया इस चुनाव में. वहीं कांग्रेस को सिर्फ 5.67% फीसदी वोट और लेफ्ट को 6.34% फीसदी वोट मिले.

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